भारत में मानव तस्करी और बाल दुर्व्यवहार
मानव व्यापार
जब व्यक्ति का व्यावसायिक शोषण किया जाता है। यदि किसी स्त्री या बच्चे का यौन शोषण होता है और इससे किसी व्यक्ति को लाभ पहुँचता है तो यह व्यावसायिक यौन शोषण बन जाता है जो वैधानिक रूप से दंडनीय अपराध है जिसमें सभी शोषकों के खिलाफ सदोषता आरोपित होती है। अवैध व्यापार वह प्रक्रिया है जिसमें व्यावसायिक यौन शोषण हेतु किसी व्यक्ति की नियुक्ति, अनुबंधन, क्रय किया जाता है अथवा उसे भाड़े पर रखा जाता है। इस प्रकार अवैध व्यापार एक प्रक्रिया है और व्यावसायिक यौन शोषण उसका परिणाम। व्यावसायिक यौन शोषण में ‘माँग’ के कारण अवैध व्यापार की उत्पत्ति होती है, उसे बढ़ावा मिलता है और उसे कायम रखा जाता है। यह एक धृणित और अनैतिक चक्र है। अवैध व्यापार दूसरे प्रकार के अनैतिक धंधों जैसे प्रोर्नोग्राफिक सामग्रियों का निर्माण, यौन पर्यटन, बारों एवं मसाज पार्लरों इत्यादि के रूप में यौन शोषण अथवा यौन दुर्व्यवहार युक्त या इससे रहित शोषण आधारित श्रम का जरिया भी बनता है।
यह आवश्यक नहीं कि व्यावसायिक क्रियाकलाप वेश्यालय में हों, बल्कि यह आवासीय स्थलों, वाहनों इत्यादि में भी हो सकता है। ऐसी सभी परिस्थितियों में, जिसमें अवैध व्यापार के कारण मसाज पार्लरों, बारों, टूरिस्ट सर्किटों, एस्कॉर्ट सेवाओं, दोस्ती क्लबों इत्यादि सहित किसी भी रूप में व्यावसायिक यौन शोषण होता है अथवा होने की संभावना रहती है, कार्रवाई करने का अधिकार होता है।
मानव अवैध व्यापार, अपराधों का अपराध है।
यह अपराधों का टोकरा है। इस टोकरे में भगा ले जाने का कार्य, अपहरण, अवैध निरोधन, अवैध बंदीकरण, आपराधिक संत्रास, चोट, गंभीर चोट, यौन प्रहार, लज्जा हरण, बलात्कार, अप्राकृतिक दुर्व्यवहार, मनुष्यों की खरीद बिक्री, दासता, आपराधिक षडयंत्र, अपराध के लिए अवप्रेरण इत्यादि अपराध पाये जाते हैं। इस प्रकार, विभिन्न समयों तथा स्थानों पर रहने वाले अनेक प्रकार के अपराध और अपराधी मिलकर अवैध व्यापार के संगठित अपराध की रचना करते हैं। कई प्रकार के मानवाधिकार हनन के मामले जैसे निजता का उल्लंघन, न्याय नहीं मिलना, न्याय तक पहुँच नहीं होना, मौलिक अधिकारों तथा गरिमा का हनन इत्यादि शोषण के अन्य पहलू हैं। अत: इसमें कोई संदेह नहीं कि अवैध व्यापार एक संगठित अपराध है।
अवैध व्यापार का शिकार हुआ व्यक्ति
किसी भी आयु का पुरुष अथवा स्त्री हो सकता है, जिसका अवैध व्यापार किसी वेश्यालय में अथवा किसी भी स्थल पर व्यावसायिक यौन शोषण हेतु किया गया है। किसी व्यक्ति को अवैध व्यापार करने के प्रयास के लिए भी सजा का प्रावधान करता है। अत: व्यक्ति के संभावित अवैध व्यापार होने से पहले ही कानून क्रियाशील हो जाता है।
अवैध व्यापार के शिकार बच्चे
बच्चा उसे माना जाता है जिसने 18 वर्ष की उम्र प्राप्त नहीं की है। अवैध व्यापार के शिकार बच्चे को देखभाल और सुरक्षा पाने का अधिकारी माना जाता है। कानून लागू करने वाली एजेंसियों का यह कर्तव्य है कि वे ऐसे बच्चों को बचाएँ, उन्हें बाल कल्याण समिति के सम्मुख उपस्थित करें तथा उनकी संपूर्ण देखभाल करें।
अवैध व्यापार का शिकार वयस्क
वयस्कों के संदर्भ में केवल उनकी सहमति ही अवैध व्यापार के प्रावधानों से बच निकलने के लिए पर्याप्त नहीं है। यदि सहमति बल प्रयोग, अवपीड़न, भय अथवा किसी दबाब के कारण ली गई हो तो ऐसी सहमति का कोई अर्थ नहीं होता और इसलिए ऐसे सभी उदाहरण अवैध व्यापार के अंतर्गत आ जाते हैं। इस प्रकार, वेश्यालय में वेश्यावृत्ति के आरोप के तहत पाये जाने पर भी एक वयस्क स्त्री को वेश्यावृत्ति का दोषी नहीं माना जा सकता जबतक कि अभिप्राय और कारणों का अनुसंधान न कर लिया जाए। व्यावसायिक यौन शोषण हेतु अवैध व्यापार की शिकार हुई महिला को व्यावसायिक यौन शोषण का शिकार माना जाता है न कि दोषी।
अवैध व्यापार करने वाले और अन्य शोषणकर्ता
• अवैध व्यापार एक संगठित अपराध है। अनेक व्यक्ति विभिन्न स्थानों जैसे नियुक्ति स्थल, पारगमन स्थल, शोषण स्थल पर रहकर अपनी करतूतों को अंजाम दे सकते हैं। इस प्रकार शोषणकर्ताओं की सूची में निम्नलिखित शामिल हैं:
• वेश्यालय का प्रभारी तथा वेश्यालय अथवा अंतिम शोषण स्थल के अन्य शोषणकर्ता
• वेश्यालय की संचालिका अथवा डांस बार, मसाज पार्लर या ऐसे अन्य स्थलों जहां शोषण को अंजाम दिया जाता है, के संचालक।
• ऐसे स्थलों के प्रबंधक तथा अन्य पात्र।
• ऐसे होटल जो शोषण के लिए प्रयुक्त होते हैं, को चलाने वाले लोग। इनमें शामिल हैं वहाँ के कर्मचारी, चौकीदार, ड्राइवर इत्यादि तथा ऐसे व्यक्ति जो उस स्थल को वेश्यालय के रूप में प्रयुक्त होने की अनुमति देते हैं, ऐसे व्यक्ति जो वेश्यालय अथवा अन्य शोषण स्थलों पर पीड़ित को रोककर रखते हैं तथा वे लोग जो सार्वजनिक स्थलों को वेश्यावृत्ति हेतु प्रयुक्त होने की अनुमति देते हैं।
• ट्रैफिक की हुई महिला का ‘ग्राहक’ निस्संदेह एक शोषणकर्ता होता है। ऐसा व्यक्ति वह होता है जिसके कारण माँग पैदा होती है और व्यावसायिक यौन शोषण होता है। अत:, ऐसा व्यक्ति कानूनों के अंतर्गत दोषी होता है
• वित्त प्रदाता: ऐसे सभी व्यक्ति जो अवैध व्यापार की विभिन्न प्रक्रियाओं हेतु धन उपलब्ध कराते हैं, इस अपराध के अंग होते हैं। इसमें वे शामिल हो सकते हैं जिन्होंने भर्ती, परिवहन, ठहरने, रहने के प्रबंधन हेतु धन मुहैया कराया हो तथा वे भी शामिल हैं जो वेश्यालयों में धन उधार देने या लेने का धंधा करते हैं।
• अपराध-सहकारी: ऐसे सभी व्यक्ति जो शोषण अथवा अवैध व्यापार की किसी भी प्रक्रिया में सहयोगी होते हैं अथवा समर्थन देते हैं, ऐसे व्यक्ति जो व्यावसायिक यौन शोषण से प्राप्त आय पर गुजारा करते हैं: कोई भी व्यक्ति जो जानते-बूझते हुए पूर्ण या आंशिक रूप से वेश्यावृत्ति से अर्जित धन पर जीता है, दोषी है। इसमें शामिल हैं वे सभी व्यक्ति जो शोषण से अर्जित अवैध लाभ के भागीदार होते हैं। ऐसे वित्त प्रदाता जो वेश्यालय (या ऐसे होटल) से प्राप्त धन उधार देते हैं तथा ऐसे धन से व्यवसाय करते हैं, इस सेक्शन के अधीन दोषी हैं। होटल चलाने वाले ऐसे लोग जो लड़कियों के शोषण से धन अर्जित करते हैं, निःसंदेह दोषी हैं।
• खुफिया सूचना देनेवाला, भर्ती करनेवाला, विक्रेता, खरीदार, ठेकेदार, दलाल अथवा कोई भी व्यक्ति जो उनके लिए कार्य करता हो।
• परिवहनकर्त्ता, आश्रयदाता तथा ऐसा कोई भी व्यक्ति जिसने शरण प्रदान किया हो, वे भी रैकेट के अंग होते हैं।
• सभी षड्यंत्रकारी: लगभग सभी अवैध व्यापार स्थितियों में अनेक व्यक्ति शोषण के विभिन्न चरणों में षड्यंत्र में शामिल होते हैं। वे सभी षड्यंत्र रचने के दोषी होते हैं। यदि कई लोगों ने मिलकर योजना बनाई हो और उसके बाद उसे अमल में लाया गया हो, तो षड्यंत्र से जुड़ा कानून लागू होता है। जिन्होंने किसी परिसर को वेश्यालय के रूप में प्रयुक्त करने की योजना बनाई हो अथवा जो शोषण से प्राप्त आय पर जीते हों, चाहे आंशिक रूप से ही क्यों न हो, अथवा वे जो व्यक्ति को वेश्यावृत्ति हेतु खरीदते हैं या प्रलोभन देते हैं अथवा लाते हैं, वे सभी षड्यंत्रकारी हैं।
बाल व्यापार
* फरवरी 1998 में, 200 बांग्लादेशी बच्चे तथा महिलाएं विभिन्न भारतीय शरणार्थी शिविरों से स्वदेश वापसी का इंतज़ार कर रहे थे। “ऊंट दौड़ में सवार बनाए जाने के लिए तस्करी किए जा रहे लड़के, भारत में छुड़ाए गए”
* थाईलैंड एवं फिलिपींस सहित भारत में सेक्स-व्यापार केन्द्रों में 13 लाख बच्चे हैं। ये बच्चे गरीब इलाकों से होते हैं तथा तुलनात्मक रूप से अमीर क्षेत्रों में अवैध तरीके से भेजे जाते हैं।
* सीमा पार अवैध तरीके से भेजने में भारत, भेजने वाला, प्राप्त करने तथा पारगमन का देश है। बांग्लादेश एवं नेपाल से बच्चे प्राप्त करना तथा महिलाओं एवं बच्चों को मध्य-पूर्वी देशों में भेजना रोज़मर्रा की बात है।
* भारत एवं पाकिस्तान 16 वर्ष से कम आयु के दक्षिण एशिया में तस्करी किए गए बच्चों के लिए मुख्य गंतव्य हैं। मसाको ऐजिमा, * 1996 में बड़े छापों के दौरान बम्बई के वेश्यागृहों से छुड़ाई गई वेश्यावृत्ति में धकेली गई 484 लड़कियों में से 40 प्रतिशत से अधिक नेपाल से थीं। मसाको ऐजिमा, * भारत में कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश, महाराष्ट्र एवं तमिलनाडु वेश्यावृत्ति में महिलाओं को झोंकने के लिए “हाई सप्लाय ज़ोन” माने जाते हैं। बीजापुर, बेलगाम एवं कोल्हापुर आम ज़िले हैं जहां से महिलाएं, नियोजित तस्करी से संजाल के अंतर्गत बड़े शहरों को जाती हैं। * महाराष्ट्र एवं कर्नाटक के सीमावर्ती ज़िले, जो ‘देवदासी क्षेत्र’ के रूप में जाने जाते हैं, में अवैध व्यापार के तंत्र विभिन्न स्तरों पर कार्य करते हैं। यहां की महिलाएं वेश्यावृत्ति में इसलिए हैं कि या तो पतियों द्वारा त्याग दी गई हैं, या उन्हें फुसलाकर अथवा धोखे से अवैध तरीके से लाया गया है। कई देवदासियां हैं जिन्हें देवी येल्लम्मा के लिए वेश्यावृत्ति को समर्पित किया गया है। कर्नाटक के एक वेश्यालय में, सभी 15 लड़कियां देवदासी हैं।
* यदि हज़ारों नहीं, तो सैकड़ों बांग्लादेशी महिलाएं एवं बच्चे विदेशी बन्दीगृहों, जेलों, आश्रयों एवं निगरानी गृहों में बन्द हैं तथा स्वदेश वापसी का इंतज़ार कर रहे हैं। कइयों को वर्षों से बन्द रखा गया है। भारत में 26 महिलाएं, 27 लड़कियां, 71 लड़के एवं अज्ञात लिंग के 13 बच्चे लिलुआ आश्रय, कलकत्ता; निर्मल छाया बालगृह, दिल्ली; लड़कों के लिए प्रयास निगरानी गृह, दिल्ली; तिहाड़ जेल, दिल्ली; उदवम कलंगेर, बंगलोर; उमर खेड़ी, बंगलोर; किसलय, पश्चिम बंगाल; कूचबिहार, पश्चिम बंगाल एवं बहरामपुर, पश्चिम बंगाल में रखे गए हैं। (बांग्लादेश राष्ट्रीय महिला वकील संघ की फौज़िया करीम फिरोज़ एवं सलमा अली, “बांग्लादेश देश शोधपत्र: कानून एवं विधान”)
* भारत से हमेशा महिलाएं एवं बच्चे मध्य पूर्व देशों में भेजे जाते हैं। भारत, पाकिस्तान एवं मध्य पूर्व में वेश्यावृत्ति तथा घरेलू कार्यों वाली लड़कियों को प्रताडित किया जाता है, कैद जैसी स्थिति में रखा जाता है, सेक्स सम्बन्धी दुर्व्यवहार तथा बलात्कार किया जाता है। * बम्बई में 9 वर्ष आयु जितने छोटे बच्चों को 60,000 रुपयों या 2,000 यूएस डॉलर्स में नीलामी में अरबों द्वारा भारतीयों से खरीदा जाता है, जो यह मानते हैं कि एक अक्षत के साथ सोने से गनोरिया तथा सिफिलिस की बीमारियां ठीक हो जाती हैं। * भारत के वेश्यालयों में 160,000 नेपाली महिलाएं हैं। * बम्बई में वेश्यावृत्ति में लिप्त लगभग 50,000 या आधी संख्या में महिलाएं नेपाल से लाई जाती हैं। * भारत के वेश्यालयों में 100,000 से 160,000 के बीच नेपाली महिलाएं तथा लड़कियां हैं, 35 प्रतिशत शादी के झूठे वादे या अच्छी नौकरी के झांसे में लाई गई थीं। * प्रतिदिन लगभग 5,000-7,000 नेपाली भारत लाई जाती हैं। भारत के वेश्यालयों में 100,000-160,000 नेपाली लड़कियों से वेश्यावृत्ति कराई जाती है। लगभग 45,000 नेपाली लड़कियां बम्बई के वेश्यालयों में हैं तथा 40,000 कलकत्ता में।
* बम्बई तथा पाकिस्तान के लिए अवैध कारोबारियों के लिए कलकत्ता महत्वपूर्ण पारगमन केन्द्रों में से एक है। बांग्लादेश से 99% महिलाएं ज़मीनी रास्तों के ज़रिए बांग्लादेश तथा भारत के सीमांत क्षेत्रों, जैसे जेसोर, सतखिरा एवं राजशाही से अवैध तरीके से लायी जाती हैं।
* भारत में आश्रयस्थलों में 200 बांग्लादेशी महिलाएं एवं बच्चे हैं जिन्हें अवैध तरीके से लाया गया है तथा जो स्वदेश वापसी का इंतज़ार कर रहे हैं।
* भारत में वार्षिक रूप से अवैध तरीके से लायी जा रही नेपाली लड़कियों की औसत आयु पिछले दशक में 14-16 वर्ष से गिरकर 10-14 वर्ष हो गई है। * बम्बई में एक वेश्यालय में सिर्फ नेपाली महिलाएं हैं, जिन्हें लोग उनकी सुनहरी चमड़ी तथा नर्म स्वभाव के कारण खरीदते हैं। * भारत में 2.5% वेश्याएं नेपाली हैं तथा 2.7% बांग्लादेशी।
* कुछ भारतीय पुरुष यह मानते हैं कि स्काल्प-एग्ज़िमा से प्रभावित वेश्याओं के साथ सेक्स करने से भाग्यवृद्धि होती है। “पस बेबीज़” नामक दशा के नवजात शिशुओं को उनके माता-पिता द्वारा वेश्यालयों को ऊंचे दामों पर बेचा जाता है। * एक धनाढ्य हाई स्कूल में सर्वक्षण किए गए छात्रों में से 70% नियोजित अपराध में करियर बनाने की इच्छा रखते हैं, तथा इसके लिए “अच्छे धन तथा मौज मस्ती” को कारण बताते हैं।
Saturday, September 18, 2010
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